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राजेंद्र कुमार कैसे बने ज्यूबिली कुमार!

राजेंद्र कुमार का करिअर जब शुरु हुआ उस वक्त राज-दिलीप और देव आनंद की तिकडी का राज था, किसी तीसरे के लिए इंडस्ट्री में शायद ही कोई जगह थी, लेकिन, ऐसे में राजेंद्र कुमार ने अपने लिए न सिर्फ जगह बनाई बल्कि, एक अलग वजूद भी स्थापित किया।

राजेंद्र कुमार,Rajendra Kumar राजेंद्र कुमार कैसे बने ज्यूबिली कुमार! Source : Press


राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद के जमाने में क्या मजाल की किसी एक्टर का वजूद रह जाता, लेकिन, एक एक्टर ऐसा था जिसने ने सिर्फ अपने वजूद को बचाए रखा बल्कि, अपने आपको ज्यूबिली कुमार के टैग से नवाजने के लिए इंडस्ट्री को मजबूर कर दिया। ये एक्टर थे राजेंद्र कुमार। 1950 में केदार शर्मा की फिल्म जोगन में एक छोटासा रोल उन्हे मिला, इस फिल्म में उनके सामने थे दिलीप कुमार और नरगिस। इसी फिल्म के प्रोड्यूसर ने पांच साल बाद राजेंद्र कुमार को लेकर फिल्म बनाई वचन, जिसके लिए राजेंद्र कुमार को सिर्फ पंद्रहसौ रुपए मेहनताना मिला था। ये फिल्म सुपरहिट रही इतनाही नहीं, ये फिल्म सिल्वर ज्यूबिली बनीं, सिल्वर ज्यूबिली का मतलब 25 हफ्ते! आज के जमाने में ये शायद बहोत बडी बात हो, लेकिन, राजेंद्र कुमार ने ये चलन उस वक्त शुरु किया था। राजेंद्र कुमार की सफलता में महान गायक मोहमंद रफीसाब का भी काफी योगदान रहा, उनके गाए गानों ने राजेंद्र कुमार को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचा दिया।


इसके बाद धूल का फूल, दिल एक मंदिर, मेरे मेहबूब, संगम, आरजू, सूरज, तलाश, आई मिलन की बेला, गंवार एक के बाद एक लगातार सुपरहिट फिल्में देनेवाले राजेंद्र कुमार ने कभी भी अपने आपको सुपरस्टार की रेस में नहीं रखा, वे हमेशा ही लो प्रोफाईल रहे, शायद यही उनके सक्सेस का राज था।