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अपने नाम से बचपन में इस गीतकार को बहुत चिढ थी. कई बार मां को बदलने के लिए बोल चुका था

इरशाद के दोस्त इरशाद को इरशाद इरशाद कहकर चिढाते थे. तब इरशाद कामिल को बड़ा गुस्सा आता था. और घर आकर वो अपने मम्मी से कहते कि मम्मी मेरा नाम वसीम रख दो. आमिर रख दो. लेकिन अब मेरा नाम इरशाद नहीं रहेगा. सभी मेरा मजाक उडाते हैं. तब मम्मी इरशाद को समझा बुझाकर शांत कर देती थी. पर यही इरशाद कामिल का नाम आज सफलता का पर्याय बन चुका है.

गीतकार इरशाद कामिल अपने नाम से बचपन में इस गीतकार को बहुत चिढ थी. कई बार मां को बदलने के लिए बोल चुका था Source : Press

गीतकार इरशाद कामिल का नाम बॉलीवुड में अब किसी पहचान को मोहताज नहीं है. इरशाद कामिल ने नाम कई कामयाब गीतों का एक गुलदस्ता है. जिसकी महक कभी खत्म नहीं होगी. और आने वाले दिनों में अभी इस गुलदस्ते में कई गीतों के फूल आकर सजने वाले हैं. पर बात जब इरशाद कामिल के बचपन की करे तो इरशाद को अपने नाम से बड़ी चिढ थी. क्योकि आप तो जानते हैं. कि जब भी कोई शायर या कवि कुछ सुनाता है. तो उसके पहले अपने सुनने वालों से हामी भरवाता है. जब सुनने वाले इरशाद कहते हैं. तब शायर या कवि अपनी बात आगे कहता था. और जब इरशाद के दोस्त इरशाद को इरशाद इरशाद कहकर चिढाते थे. तब इरशाद कामिल को बड़ा गुस्सा आता था. और घर आकर वो अपने मम्मी से कहते कि मम्मी मेरा नाम वसीम रख दो. आमिर रख दो. लेकिन अब मेरा नाम इरशाद नहीं रहेगा. सभी मेरा मजाक उडाते हैं. तब मम्मी इरशाद को समझा बुझाकर शांत कर देती थी. पर यही इरशाद कामिल का नाम आज सफलता का पर्याय बन चुका है. आज के गीतकारों की बात अगर करे. तो उनमें इरशाद कामिल का नाम सबसे पहले आता है.

इरशाद इम्तियाज अली और ए आर रहमान की तिकड़ी ने तो कई नायाब रचनाएं हमें दी है. वैसे इरशाद कामिल ने बॉलीवुड में अपने सफर का आगाज़ स्क्रिप्ट राइटिंग से किया था. कई फिल्में के संवाद लिखने के बाद संदेश शांडिल्य के साथ इरशाद ने अपने आप को तराशा. फिर गीत लिखने लगे. इरशाद ने जब वी मेट. चमेली. लव आजकल. आशिकी-2. हाइवे और जब हैरी मेट सेजल जैसी फिल्मों के गीतों को अपनी कलम के जादू से सजाया है.


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