सुधा चंद्रन को आखिर क्यों नहीं मिल रहा है फिल्मों में काम

नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे एक ऐसे व्यक्ति की जिन्होंने अपने नृत्य से पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया था. यहाँ तक एक दर्दनाक हादसे में उन्होंने अपना पेअर खो दिया था. लेकिन उन्होंने अपनी किस्मत से हार नहीं मानी और एक बेहतरीन नृत्यकार बनकर दुनिया में मिसाल कायम कर दिया. हम बात कर रहे है सुधा चंद्रन की जो भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री की बेहद ही मशहूर अभिनेत्री है.

सुधा चंद्रन को आखिर क्यों नहीं  मिल रहा है फिल्मों में काम सुधा चंद्रन को आखिर क्यों नहीं मिल रहा है फिल्मों में काम Source : Press

नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे एक ऐसे व्यक्ति की जिन्होंने अपने नृत्य से पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया था. यहाँ तक एक दर्दनाक हादसे में उन्होंने अपना पेअर खो दिया था. लेकिन उन्होंने अपनी किस्मत से हार नहीं मानी और एक बेहतरीन नृत्यकार बनकर दुनिया में मिसाल कायम कर दिया. 

हम बात कर रहे है सुधा चंद्रन की जो भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री की बेहद ही मशहूर अभिनेत्री है. सुधा चंद्रन का जन्म 21 सितम्बर 1964 को केरल में हुआ था. सुधा चंद्रन के पिता के.डी. चंद्रन भी जाने माने अभिनेता रह चुके है. 

टेलीविज़न के अलावा सुधा ने कई बॉलीवुड फिल्मों भी काम किया है. सुधा चन्दन बड़े परदे पर अपने नेगेटिव रोल के लिए जानी जाती है . आपको बता दे, सुधा चन्द्रन को अपनी डेब्यू फिल्म मयूरी में नेशनल अवार्ड से नवाजा गया .

टीवी की दुनिया में रमोला सिकंद के नाम से मशहूर सुधा चंद्रन फिलहाल फिल्मों से दूर है. उन्होंने 90 के दशक में कई फिल्मों और टीवी सीरियल में काम किया है. सुधा चंद्रन को आज के तारिक में कौन नहीं जानता. बॉलीवुड फिल्मों से लेकर TV सीरियल की दुनिया तक सुधा चंद्रन ने कहीं किसी रोज़ की रमोला सिकंद और नागिन की यामिनी सिंह रहेजा वो अपने किरदारों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. वह आखिरी बार बॉलीवुड फिल्म मालामाल वीकली में नज़र आई थी. यह फिल्म 13 साल पहले रिलीज़ हुई थी. इसके बाद से वह फिल्मों से दूर है.

 हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने फिल्मों में काम न मिलने को लेकर अपना दर्द जाहिर किया. उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया की उन्हें फिल्में क्यों नहीं मिल रही है. जब रिपोर्टर ने उनसे पूछा की फिल्मों के ऑफर ना मिलने के पीछे क्या वजह है तब उन्होंने कहा, 'मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. मुझे नहीं पता कि मालामाल वीकली के बाद मुझे क्यों कोई फिल्म नहीं मिली. फिल्म में सब पुरुषों के बीच मैं इकलौती महिला थी. फिल्म में दर्शकों को मेरा काम पसंद आया और मुझे उसके लिए सराहा भी गया.'

उन्होंने आगे कहा, 'बहुत लोगों को लगता है कि मैंने फिल्मों के ऑफर रिजेक्ट किए, लेकिन सच ये है कि इंडस्ट्री से मुझे एक भी ऑफर नहीं मिला. मैं बहुत बार खुद से पूछती हूं कि क्यों प्रोड्यूसर और डायरेक्टर मुझे अप्रोच नहीं कर रहे हैं. मैं फिल्मों में कई ऐसे रोल देखती हूं जिन्हें मैं निभा सकती थी.' 'मेरे लिए यह दुखद है कि जब इतनी तरह की फिल्में बन रही हैं तब मुझे फिल्म नहीं मिल रही है.' बहरहाल सुधा इन दिनों स्टार प्लस के शो 'ये हैं मोहब्बतें' में काम कर रही हैं.इससे पहले वह सीरियल नागिन में नज़र आई थी. 

उन्होंने आगे कहा की, 'मुझे फिल्म ना मिलने और मेरा टीवी सीरियल में काम करना दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है. ऐसी महिला एक्टर हैं जो टीवी और फिल्मों में साथ-साथ काम कर रही हैं. इन अभिनेत्रियों में किरण खेर, नीना गुप्ता और सुप्रिया पाठक जैसे नाम शामिल हैं.

ज़िन्दगी में सुधा ने कई उतार चढाव देखा. आपको बता दे, 1981 में सुधा का एक्सिडेंट हो गया था.  जिस वक़्त उनका एक्सीडेंट हुआ वह केवल 16 साल की थीं. इस एक्सीडेंट में उनका पैर जख्मी हो गया था. इसके बाद उनके पैर को काटना पड़ा था और लकड़ी का पैर लगाया गया. इस दौरान वह अपना डांस भी नहीं कर पाई. फिर सुधा चंद्रन ने करीब 2 साल के गैप के बाद क्लासिकल डांस में अपनी वापसी की थी. 

 
दरहसल सुधा चंद्रन एक दिन अपने माता पिता के साथ तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में मौजूद एक मंदिर से वापस लौट रही थी. वह उस वक़्त अपने परिवार के साथ मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रही थी, तभी सामने से आ रही एक ट्रक ने उनकी गाडी को टक्कर मार दिया. 

 
यह दुर्घटना बेहद ही दर्दनाक थी जिसमें बोहोत से लोग घायल हुए थे. सभी घायलों को पास ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जब सुधा को अस्पताल ले गया तब पता चला की उनकी पैर की हड्डी टूट गयी है. डॉक्टर ने तुरंत उनका इलाज करना शुरू किया और कुछ ही समय बाद डॉक्टर ने कहा की सुधा चंद्रन के दाहिने पैर में गैंग्रीन का संक्रमण हो गया है, वो दुर्भाग्यवश उनके टूटे हुए पैर में हो गया था. डॉक्टर्स ने ये चेतावनी दी की अगर इसे समय रहते नहीं काटा गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. ये बात सुनते ही उनके माता पिता ने डॉक्टर्स को उनके दाहिने पैर को काटने की अनुमति दी.

इस हादसे से सुधा टूटी नहीं बल्कि उनका दृढ निश्चय और भी बढ़ गया. सुधा ने यह प्रण लिया की वो इस बात को कभी ज़ाहिर नहीं करेंगी की उनकी ज़िन्दगी में कोई हादसा हुआ है और उनकी ज़िन्दगी पहले से अलग है, बल्कि यह कोशिश करेंगी की उनकी ज़िन्दगी बिलकुल पहले जैसी है. यह मिसाल रखने के लिए उन्होंने नृत्य को अपना माध्यम चुना.
सुधा चंद्रन की जीवनी से हम सब को ज़िन्दगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. इतने बड़े हादसे के बावजूद भी उन्होंने इसे आपकी सफलता के आगे रूकावट नहीं बनने दिया. अपने दृढ-निश्चय के साथ सुधा चंद्रन ने ज़िन्दगी की सभी मुसीबतों का सामना किया और उन्होंने जो भी किया उसमें सफल रहीं.


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