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मोहंमद रफी का अलविदा आखिरी अलविदा साबित हुआ

मोहंमद रफी का नाम संगीत की दुनिया में काफी इज्जत से लिया जाता है। आज भी उनके फैन्स उनके गानों को सुनते हैं, लेकिन, क्या आपको ये पता है कि, एक बार गाने की रिकॉर्डिंग खत्म करके निकले रफी के वो लब्ज आखिरी लब्ज साबित हुए। जब उन्होने कहा था

मोहंमद रफी मोहंमद रफी का अलविदा आखिरी अलविदा साबित हुआ Source : Press
कहते हैं सत्तर के दशक में पाकिस्तान में गायक मोहंमद रफी जितने लोकप्रिय थे उतने तो उस वक्त के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी नहीं थे। एक से एक बेहतरीन गानों से वे पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चुके थे। ये दिन था 31 जुलाई 1980, एक गाने की रिकॉर्डिंग के बाद उन्होने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को जाने से पहले कहा, "भई अब हो चुका, मुझे इजाजत दो" किसे पता था, कि, वे अलविदा उनकी जिंदगी की आखिरी अलविदा साबित होनेवाली थी। दोपहर में गाने की शुटिंग से वे निकले और शाम साढे सात बजे के करीब उन्हे दिल का दौरा पड़ा और वे चल बसे। उनके निधन पर दिलीप कुमार ने कहा, कि, मुझे लग रहा है कि, मेरी आवाज ही चली गई, बात दिलीप साहब ने एकदम सटीक कही थी, अब तक दिलीप कुमार के जितने गाने सुपरहिट हुए थे उन सबमें मोहमंद रफी ने ही अपनी सुरमयी आवाज का जादू बिखेरा था। मोहंमद रफी की आवाज की जादू महज 13 की उम्र में सबके सामने आयी थी। रफी और उनके भाई संगीत के एक कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायक कलाकार के.एल.सहगल को सुनने के लिए गए। लेकिन बिजली चली जाने के कारण जब के.एल.सहगल ने गाने से इंकार कर दिया तब उनके भाई हमीद कार्यक्रम के संचालक के पास गए और उनसे गुजारिश की कि वह उनके भाई रफी को गाने का एक मौका दे। संचालक के राजी होने पर रफी ने पहली बार 13 वर्ष की उम्र में अपना पहला गीत स्टेज पर दर्शकों के बीच पेश किया। दर्शको के बीच बैठे संगीतकार श्याम सुंदर को उनका गाना काफी पसंद आया और उन्होने रफी को मुंबई आने का न्यौता दे दिया।

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