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  • Thursday 27 April 2017 / 10:26 PM IST
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कैसे बनी संगीतकार लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल की जोड़ी

मो. रफी और लता मंगेशकर जैसी हस्तियां लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के मेंटर थे. इस संगीतकार के ज्यादातर कामयाब गाने रफी लता और आशा भोसले की आवाज़ों में ही रिकॉर्ड हैं. बात अगर इन दोनों के शुरूआती दिनों की करे. तो लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल. दोनों का बचपन करीब करीब एक ही समान था. दोनों ही संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते थे.

लक्ष्मीकांत, प्यारेलाल कैसे बनी संगीतकार लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल की जोड़ी Source : Press
हिंदी सिनेमा में जैसे हर कलाकार का एक दौर था. वैसे ही संगीतकारों और गायक गायिकाओं का भी अपना एक दौर होता था. हिंदी सिनेमा के शुरूआती दौर में श्याम सुंदर नौशाद. हुस्नलाल भगतराम. शंकर जयकिशन जैसे संगीतकारों के साथ भी यहीं हुआ था. जैसे जैसे शंकर जयकिशन और कल्याणजी आनंदजी के संगीत की चमक फीकी होती जा रही थी. वैसे वैसे एक नये संगीतकार की जोड़ी अपना परचम लहरा रही थी. और ये जोड़ी थी संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की. इस जोड़ी को पहली बड़ी कामयाबी मिली थी फिल्म पारसमणि के गानों से. इसके बाद तो इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा के संगीत में कभी पीछे मुडकर नहीं नहीं देखा. मो.रफी और लता मंगेशकर जैसी हस्तियां लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के मेंटर थे. इस संगीतकार के ज्यादातर कामयाब गाने रफी लता और आशा भोसले की आवाज़ों में ही रिकॉर्ड हैं. बात अगर इन दोनों के शुरूआती दिनों की करे. तो लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल. दोनों का बचपन करीब करीब एक ही समान था. दोनों ही संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते थे. एक बार लक्ष्मीकांत को लता जी ने एक म्यूजिकल इंस्ट्रमेंट बजाते देखा तो लता बहुत खुश हुई और लक्ष्मीकांत को सुरील कला केंद्र में संगीत की शिक्षा के लिए भेजवा. उधर प्यारे लाल भी इसी संस्थान में संगीत सीखने आए. यहीं पर दोनों की मुलाकातें हुई. फिर वक्त के साथ दोनों साथ ही साथ आगे बढते रहे. एक साथ इन दोनों ने कल्याणजी आनंदजी के अलावा कई दूसरे संगीतकारों जैसे आरडी बर्मन के साथ भी सहायक के रूप में काम किया. और इसके बाद एसडी बर्मन के कहने पर दोनों ने औरो की तरह अपनी जोड़ी बनाई. एक साथ काम करने की. लेकिन शुरूआती दौर में इन्हे काम नहीं मिला. इससे यो दोनों काफी निराश थे. एक बार तो इन्होने मुंबई छोडने की बात भी सोची थी. पर तभी उन्हे पारसमणि जैसी फिल्म मिली. जिसने इस संगीतकार जोड़ी को हिंदी सिनेमा में स्थापित होने का बहाना दे दिया. और बाद में क्या हुआ ये बताने की जरूर नहीं हैं.